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भारत सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ मिलकर हथकरघा बुनकरों को बीमा कवर देने के लिए बुनकर बीमा योजना शुरू की। इस योजना में सभी समुदायों के बुनकरों का स्वाभाविक मृत्यु, दुर्घटना से मृत्यु तथा दुर्घटना से हुई आंशिक या स्थायी विकलांगता के लिए बीमा किया जाता है। योजना का संचालन एलआईसी करता है और बीमा कवरेज को राज्य का हथकरघा प्राधिकरण अंतिम रूप देता है।


पात्रता की शर्तें

इस योजना में बीमा कराने के इच्छुक बुनकर को नीचे दी गई शर्तें पूरी करनी होंगी।

  • बुनकर की कम से कम 50% आय हथकरघा बुनाई से होनी चाहिए।
  • 18 से 59 वर्ष की आयु के सभी बुनकर आवेदन कर सकते हैं, जिनमें अल्पसंख्यक, महिला बुनकर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकर शामिल हैं।
  • राज्य हथकरघा विकास निगमों, शीर्ष अथवा प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों से जुड़े बुनकर योजना में शामिल हैं। सहकारी समितियों से बाहर के बुनकर भी शामिल हैं, यदि वे राज्य हथकरघा निदेशालय का पात्रता प्रमाण पत्र दें।
  • योजना में शामिल किए जाने वाले बुनकरों की पात्रता की जांच राज्य के हथकरघा प्रभारी निदेशक करते हैं।
  • राज्य निदेशक और एलआईसी यह सुनिश्चित करते हैं कि महिला बुनकरों, अल्पसंख्यक बुनकरों और पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और सिक्किम) के बुनकरों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले।

बीमा कवर की विशेषताएं

महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना हथकरघा बुनकरों को निम्नलिखित बीमा कवर देती है।

  • सदस्य की स्वाभाविक मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को ₹60,000 की बीमित राशि दी जाती है।
  • दुर्घटना से मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर ₹1,50,000 की बीमित राशि दी जाती है। आंशिक विकलांगता पर बीमित राशि ₹75,000 है।

बीमा कवर का प्रीमियम

प्रति आवेदक ₹470 का वार्षिक प्रीमियम इस प्रकार बांटा जाता है:

क्र. सं. अंशदान धनराशि
1 भारत सरकार का अंशदान ₹290
2 बुनकर का अंशदान ₹80
3 एलआईसी का अंशदान ₹100
कुल प्रीमियम ₹470
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